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मेरठ में संघ प्रमुख मोहन भागवत के हिंदुत्व को लेकर दिए गए बयान पर लखनऊ के सियासी गलियारों में भी राजनीति शुरू हो गई है. सत्ताधारी बीजेपी ने जहां हिंदुत्व को मूल विचारधारा में शामिल बताते हुए मोहन भागवत के बयान का समर्थन किया है, वहीं विपक्षी दलों ने ध्रुवीकरण की राजनीति का आरोप लगाते हुए बीजेपी और संघ को हिंदुत्व की नई परिभाषा ना देने की नसीहत दी है.

मेरठ में आयोजित आरएसएस के राष्ट्रोदय समागम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दरसअल मोहन भागवत ने कट्टर हिंदुत्व को कट्टर उदारता और कट्टर अहिंसा की संज्ञा दी. बसपा के विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा और कांग्रेस की नेता अराधना मिश्रा ने कहा कि संघ, बीजेपी और खासकर पीएम मोदी शुरू से ही ध्रुवीकरण की राजनीति करते रहे हैं और चुनाव से पहले ही इनको हिंदुत्व की याद आती है. किसी के भी द्वारा हिंदुत्व को नई परिभाषा देने से उसका मतलब नही बदल जायेगा. आरएसएस हिंदुत्व की परिभाषा का राजनीतिकरण बंद करे.

वहीं मामले में योगी सरकार के वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने संघ प्रमुख के बयान का समर्थन किया है और हिंदुत्व को हमारी मूल विचारधारा में शामिल बताया है. उन्होंने चुनाव आने से पहले ही ऐसे बयानों के सामने आने की बात कहना सही नहीं है, आगामी लोकसभा चुनाव योगी सरकार के किए गए विकास कार्यों पर ही होगा.

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