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माँ तो माँ होती है,
जब तुम हो बीमार
माँ कहा सोती हैं ।

पेट तुम्हारा भरने के लिए,
कितनी बार वो भूखे सोती है,
माँ तो माँ होती है।

घर की परेशानी की भनक तुम्हे न लगे,
इसलिए रातों को रोती है।

बीमार तुम न हो जाओ,
इसलिए तुम्हारे गीले किये बिस्तर पर सोती है,
माँ तो माँ होती है।

बूढ़ी कितनी ही क्यों न हो जाए,
तुम्हारी खुवाहिसों को पूरी करने की हिम्मत होती है,
माँ तो माँ होती है।
माना बड़े हो गए तुम,
पर उसके आँचल से सारा जग छोटा है,
उसके एक आशीर्वाद में दुनिया से लड़ने की ताक़त होती है।

 

लेखक – निधी तिवारी

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