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हाथरस। हाथरस विधानसभा सीट राजनैतिक पार्टियों के लिए नाक की लड़ाई रही है। सभी राजनैतिक पार्टियां इस सीट पर कब्जा हासिल करना चाहती हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने हाथरस सीट पर जोरदार जीत हासिल की थी। इस चुनाव में भाजपा को इस सीट से जीत की आशा है। वहीं भाजपा की प्रतिद्वंदी बसपा मानी जाती है। यहां बसपा की तरफ से रामवीर उपाध्याय तीन बार विधायक रह चुके हैं। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि क्या एक बार फिर भाजपा हाथरस विधान सभा सीट पर जीत का परचम लहरा पाएगी?

अगले साल में विधान सभा चुनाव आयोजित होंगे। इस राजनैतिक समर में भाग लेने के लिए सभी राजनैतिक पार्टियों ने कमर कस ली है। हाथरस में तीन विधानसभा सीट हैं हाथरस, सादाबाद और सिकंद्राराऊ। हाथरस सीट पर खासकर सब की नजर रहती है। पूर्व में हाथरस में साल 1996, 2002 और 2007 में बसपा की तरफ से रामवीर उपाध्याय ने जीत हासिल की थी। वे यहां से विधायक रह चुके हैं। वर्तमान में वे सादाबाद से विधायक हैं। हालाकि बीच में बसपा ने उन्हें पार्टी से अलग कर दिया था। इसके बाद उनकी पत्नी सीमा उपाध्याय ने हाथरस से जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ीं और जीत हासिल करके जिलापंचायत अध्यक्ष बनीं। वे वर्तमान में जिला पंचायत अध्यक्ष हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से हरिशंकर माहौर ने जोरदार जीत हासिल की थी। वे यहां से विधायक विधायक हैं। अब इस बार विधान सभा चुनाव में भाजपा, बसपा, सपा, रालोद व कांग्रेस समर में लड़ने के लिए तैयार हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या हाथरस विधान सभा सीट से भाजपा एक बार फिर जीत का परचम लहरा पाएगी? इस सवाल का जवाब तो अभी भविष्य के गर्त में ही छिपा है।

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