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गाजियाबाद।श्री सुल्लामल रामलीला कमेटी की लीला में लंका दहन के बाद बुधवार को विभीषण शरणागति, अंगद रावण संवाद एवं लक्ष्मण शक्ति का सुंदर मंचन किया गया। आज की लीला में मुख्य अतिथि वित्त मंत्री सुरेश अग्रवाल व खाद्य रसद मंत्री अतुल गर्ग ने आनन्द लिया जिन का कमेटी के अध्यक्ष वीरू बाबा व महामंत्री मनोज गोयल ने कमेटी के सभी पदाधिकारियों के साथ शॉल ओढ़ाकर व प्रतीक चिन्ह भेंट कर मंच से सम्मान किया। इस अवसर पर मंत्री सुरेश अग्रवाल ने कहा दशहरा बुराई पर अच्छायी की विजय का प्रतीक है। अतुल गर्ग ने अच्छी व व्यवस्थित लीला के लिए आयोजको को बधाई दी।
सीता हरण के बाद विभीषण अपने भाई लंकापति रावण से अनुरोध करते हैं कि वह सीता जी को वापस कर प्रभु राम की शरण में चले जाएं। इससे क्रोधित होकर भरे दरबार में रावण लात मारकर विभीषण को निकाल देता है।लंका को छोड़ विभीषण दुःखी मन से राम की शरण मे जाते है। वहा विभीषण को श्रीराम गले लगाते हैं।
हनुमान, अंगद और जामवंत जैसे कई विद्वान प्राण विद्या में पारंगत थे। राम ने अंगद से कहा कि हे अंगद! रावण के द्वार जाओ। कुछ सुलह हो जाए, उनके और हमारे विचारों में एकता आ जाए, जाओ तुम उनको शिक्षा दो।  प्रभु राम के कहने पर  अंगद रावण के दरबार में पहुंचा और  रावण को समझाया कि सीता को वापस भेज दें और प्रभु राम से मित्रता कर ले  लेकिन  अंगद द्वारा लाख बार समझाने के बाद भी रावण नहीं माना  और  रावण अंगद में  वाक् युद्ध होने लगा। अंगद ने रावण से कहा यदि कोई भी मेरा पग को एक क्षण भी अपने स्थान से दूर कर दोगे तो मैं उसी समय में माता सीता को त्याग करके राम को अयोध्या ले जाऊंगा। अंगद ने प्राण की क्रिया की और उनका शरीर विशाल एवं बलिष्‍ठ बन गया। राजसभा में कोई ऐसा बलिष्ठ नहीं था जो उसके पग को एक क्षण भर भी अपनी स्थिति से दूर कर सके। अंगद का पग जब एक क्षण भर दूर नहीं हुआ तो रावण उस समय स्वतः चला परन्तु रावण के आते ही उन्होंने कहा कि यह अधिराज है, अधिराजों से पग उठवाना सुन्दर नहीं है। उन्होंने अपने पग को अपनी स्थली में नियुक्त कर दिया और कहा कि हे रावण! तुम्हें मेरे चरणों को स्पर्श करना निरर्थक है। यदि तुम राम के चरणों को स्पर्श करो तो तुम्हारा कल्याण हो सकता है। रावण मौन होकर अपने स्थल पर विराजमान हो गया।
राम और रावण की सेना में युद्ध प्रारम्भ हो जाता है राम के आगे रावण की सेना विचलित होने लगी और निशाचरों के लगातार मारे जाने पर लंकाधिपति रावण परेशान हो जाता है और वह अपने पुत्र इन्द्रजीत मेघनाथ को रणभूमि में जाने के लिए कहता है। मेधनाथ अपने पिता से आज्ञा लेकर रणभूमि में पहुंचता है। जहां शेषावतार लक्ष्मण जी से उसका भयंकर युद्ध होता है। मेघनाथ बहृमा द्वारा दी गयी शक्ति का आवाहन कर उसे प्राप्त करने के बाद शक्ति का प्रहार लक्ष्मण जी पर करता है। जिससे वह मूíछत हो समर भूमि में गिर जाते है।
सीता विदाई में मुख्य रूप से अशोक गोयल उस्ताद, शिव ओम बंसल, संजीव मित्तल, अनिल चौधरी, दिनेश शर्मा, अलोक गर्ग, सुभाष गुप्ता, ज्ञान प्रकाश गोयल, राजेंद्र मित्तल मेदी वाले, पवन सिंह, विनय सिंधल, सुबोध गुप्ता, लाल चंद शर्मा, अजय गुप्ता अपूर्व बिल्डर्स, प्रेम चंद गुप्ता, नरेश अग्रवाल, सुंदर लाल, सुनील चौधरी, विपिन गर्ग सुभाष बजरंगी, वीरेंद्र कुमार कंडेरे, श्री कांत राही, नीरज गोयल आदि का विशेष सहयोग रहा

INPUT – MANOJ BHATNAGAR

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