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सिकंदराराऊ : ममता फार्म हाउस में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन समाज सुधारक कविताओं के साथ सैकड़ों श्रोताओं की उपस्थिति में तालियों की गड़गड़ाहट के बीच संपन्न हुआ।कवि सम्मेलन का शुभारंभ अंतर्राष्ट्रीय गीतकार रामेंद्र मोहन त्रिपाठी आगरा , दिल्ली के वरिष्ठ व पुरस्कृत कवि राधेश्याम बंधु व अभी हाल में विदेशों में धूम मचा कर आए कवि डॉ अजय अटल , डीजीएम बीएसएनएल गाजियाबाद ह्रदेश दीक्षित , जलाली इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य ललित मोहन सिंह, जे पी ग्रुप के सहायक अभियंता अभिषेक दीक्षित एवं एसडीओ सिंचाई बुलंदशहर अनुराग दीक्षित द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करके किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पत्रकार तेजवीर सिंह चौहान ने की वहीं संचालन हिंदी प्रोत्साहन समिति के अध्यक्ष देवेंद्र दीक्षित शूल ने किया।
कवि अजय अटल की सरस्वती वंदना के पश्चात आगरा से पधारीं कवयित्री श्रीमती यशोधरा यादव यशो ने पढ़ा ‘-जन्म मृत्यु आना जाना आत्मा का खेल है ।
आदमी करता रहे जो आदमी का धर्म है ।
वहीं अलीगढ़ से पधारे वरिष्ठ कवि पंडित नरेंद्र शर्मा नरेंद्र ने पढ़ा – मिले खुशियां जमाने की कभी मगरूर मत होना।
बुढ़ापे में कभी माता-पिता से दूर मत होना।
शिवम कुमार आजाद ने पाकिस्तान पर पंक्तियाँ पढ़ी – तुम्हारे वतन में लहू बह रहा है हमारे लहू में वतन बह रहा है।
आगरा के कवि गया प्रसाद मौर्य रजत ने पढ़ा -एक बेटी पालें आओ लाड़ प्यार से
जग बिच शीतल फुहार हैं ये बेटियां ।
दिल्ली के कवि राधेश्याम बंधु ने पढ़ा ‘-परिंदों की उड़ानों की हिफाजत भी जरूरी है
यह दुनियां बंधु बस चलती मशीनों से नहीं ,
वतन के वास्ते थोड़ी मोहब्बत भी जरूरी है ।
एटा के कवि राजेश जैन ने बेटियों पर हो रहे अत्याचार के संबंध में पढ़ा- चाकुओं को लिए आंखों में घूमते कत्ल करने शिकारों को ढूंढते ।
अलीगढ़ के युवा कवि मानव सिंह राना ने पिता के लिए पढ़ा- हर पल प्यार से समर्पित हो जाने का फन
उड़कर चिड़िया जैसे चुगा लाने का फन।
कवि अजय अटल की पिता पर पढ़ी गई कविता बहुत सराही गई
वहीं उन्होंने पढ़ा- बड़ी है नदिया या किनारे बड़े हैं जो कि पानी की धारा को बांधे खड़े हैं ।
अंत में रामेंद्र मोहन त्रिपाठी को लोगों ने उनके विभिन्न गीतों की मांग करते हुए डेढ़ घंटे तक सुना। “रंग रंग के सांप तुम्हारी दिल्ली में क्या कर लोगे आप हमारी दिल्ली में।
“राजनीति की मंडी बड़ी नशीली है”
आजादी के बाद चली जो क्या कहने उनको आंधी के,
जिनके नंगे पांव थे उनके जूते आ गए चांदी के ।
लोहार की लली कविता की मांग भी हुई पर वह नहीं सुनाई । कवयित्री श्रीमती कविता भारद्वाज ने भी अपने पिता के लिए कविता पढ़ी जो खूब सराही गई।
यह कार्यक्रम जलाली इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य प्रसून पत्रिका के संपादक साहित्यकार एवं कवि देवेंद्र दीक्षित शूल के बड़े भाई स्वर्गीय ज्ञानेंद्र बाबू दीक्षित की पुण्यतिथि पर आयोजित किया गया था। इस अवसर पर स्वर्गीय दीक्षित के छायाचित्र पर उनके प्रिय जनों ने पुष्पार्चन किया और उनकी अच्छाइयों पर प्रकाश डालते हुए उनके बड़े भाई सेवानिवृत्त प्रवक्ता विज्ञान भास्कर ने कहा कि हम सभी को समाज हित में अच्छे कार्य करने चाहिए।
इस अवसर पर पधारे प्रमुख लोगों में जिला सहकारी बैंक के नवनिर्वाचित डायरेक्टर नरेंद्र सिंह जादौन , समाजसेवी हरपाल सिंह यादव , जलाली इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य ललित मोहन, डॉ शरीफ अली, कुंवर विमल साहित्य संस्था के अध्यक्ष व कवि प्रमोद विषधर , सिविल बार के सचिव चंद्रप्रकाश शर्मा एडवोकेट, दी बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बृजेश पाठक ,नोटरी एड कोषाध्यक्ष देवकांत कौशिक, महेश यादव संघर्षी , देवा बघेल , पंकज राठी , दिलीप गुप्ता ,अन्नू राठी, हिमांशु दीक्षित एडवोकेट, युवा समाजसेवी आकाश दीक्षित, कवि प्रमोद विषधर , सुरेश सैनी, देवेंद्र शर्मा सेवानिवृत्त लेखपाल चंदौसी, वीरेंद्र सिंह चौहान वन विभाग, सेवानिवृत्त उप प्रधानाचार्य विज्ञान भास्कर दीक्षित , सेवानिवृत्त प्रवक्ता श्यौराज सिंह यादव फुलरई, सेवानिवृत्त इंजीनियर राघवेंद्र दीक्षित, सुनील भारद्वाज, मयंक माही , राहुल द्विवेदी, कुंवर पाल सिंह चौहान, प्रेमचंद शर्मा एडवोकेट अलीगढ़ , अलका दीक्षित कल्पना दीक्षित , सरिता शर्मा प्रियंका ,गरिमा , प्रीती , शालिनी अनामिका , राधेश्याम दीक्षित , शिवेंदु दीक्षित , मधुकर शंखधार, विवेक यादव आदि मौजूद रहे।

INPUT – VINAY CHATURVEDI

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