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मानवता के धर्म को सर्वोपरि मानकर समाज सेवा को रहें तत्पर : स्वामी पूर्णानंदपुरी जी
अलीगढ। कड़कड़ाती ठंड में लाचार,असहाय एवं गरीबों की सहायता हेतु वैदिक ज्योतिष संस्थान एवं आध्यात्मिक सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में कम्बल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।अचल ताल स्थित माता की बगिया पर संस्था के सदस्यों द्वारा कंबल और खाद्यान्न बाँटे गए।
सनातन धर्म प्रचार प्रसार के लिए समर्पित शहर के प्रतिष्ठित वैदिक ज्योतिष संस्थान एवं शिक्षा स्वास्थ्य और अध्यात्म के लिए आध्यात्मिक सेवा संस्थान के द्वारा समय समय पर अनेकों सामाजिक और धार्मिक कार्य किये जाते रहें हैं,इसी क्रम में रविवार को पूज्य स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज के निर्देशन में संस्थान के सदस्यों द्वारा मानवता के धर्म का पालन करते हुए शहर में जगह जगह जाकर गरीब एवं असहायों की मदद हेतु कंबल दान किये गए। स्वामी पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने बताया कि मानव का जन्म स्वयं की सेवा करने के लिए नहीं बल्कि इस जन्म में परोपकार की भावना के साथ असहाय और जरूरतमंद लोगों के लिए निःस्वार्थ भाव से सेवा करने के उद्देश्य से होता है अतः इस अमूल्य जीवन को व्यर्थ न गँवाकर परोपकार के लिए लगाना चाहिए।
आध्यात्मिक सेवा संस्थान के अध्यक्ष श्री राजकुमार भारद्वाज ने बताया कि मानव सेवा ईश्वर की सच्ची सेवा है,इसी उद्देश्य से संस्था द्वारा समय समय पर विश्व मंगलकामना हेतु सामूहिक शिविर और आयोजनों द्वारा निरंतर समाज कल्याण के कार्य किये जाते हैं, वहीं विश्व कल्याण सेवा संस्थान के उपक्रम वैदिक ज्योतिष संस्थान द्वारा जेल में बंद कैदियों द्वारा पितृ पक्ष के दौरान श्राद्ध तर्पण का सामूहिक अनुष्ठान और निशुल्क कालसर्प योग जैसे विशाल अनुष्ठान करवाए जा चुके हैं,निर्धन कन्याओं के विवाह और ब्राह्मण बच्चों के लिए निशुल्क कर्मकांड की शिक्षा हेतु यह संस्था अनेकों कार्य कर रही है। लगातार बढ़ रही ठंड से राहत हेतु जहाँ असहायों की सहायता के लिए विभिन्न सामाजिक संस्थाएं कार्यरत हैं वहीं बिना किसी धार्मिक भेदभाव के मानव धर्म को सर्वोपरि रखते हुए सभी समर्थ लोगों को आगे बढ़कर लोक कल्याण के लिए कार्य करना चाहिए।कंबल वितरण आयोजन में आचार्य गौरव शास्त्री,ठाकुर राहुल सिंह,जितेंद्र गोविल,ब्रजेन्द्र वशिष्ठ,रजनीश वार्ष्णेय,तेजवीर सिंह जादौन,शिब्बू अग्रवाल,पवन तिवारी,नवीन चौधरी,ऋषभ शास्त्री आदि उपस्थित रहे।

INPUT – VINAY CHATURVEDI

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