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अलीगढ : पौराणिक वृत्तान्तों के अनुसार कलिकाल में जीवंत अष्ट चिरंजीवियों में से एक भगवान विष्णु के छठवें अवतार भगवान परशुराम का जन्म महर्षि भृगु के पुत्र जमदग्नि तथा पत्नी रेणुका के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को हुआ था। शुक्रवार को अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर भगवान श्री परशुराम का अवतरण दिवस वैदिक ज्योतिष संस्थान पर बड़े धूम धाम से मनाया गया।
शुक्रवार को स्वर्ण जयंती नगर सीजन्स अपार्टमेंट स्थित वैदिक ज्योतिष संस्थान कार्यालय पर महामंडलेश्वर स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज के निर्देशन में संस्थान के सदस्यों द्वारा भगवान परशुराम की प्रतिमा का माल्यार्पण किया गया उसके बाद आचार्य गौरव शास्त्री,शिवम व्यास,मनोज मिश्रा,चंदर शास्त्री,ऋषभ शास्त्री आदि अचार्यों ने माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा अर्चना की।
वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने इस अवसर पर अपने वक्तव्य देते हुए कहा कि कलियुग में आज भी ऐसे 8 चिरंजीव देवता और महापुरुष हैं, जो जीवित हैं। इन्हीं 8 चिरंजीवियों में एक भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम भी हैं।ब्राह्मण कुल में अवतरित होने के वावजूद भी क्षत्रियों जैसा व्यवहार रखने वाले भगवान परशुराम विष्णु के अवतार हैं। भगवान शिव के परमभक्त परशुराम न्याय के देवता हैं। इन्होंने 21 बार इस धरती को क्षत्रिय विहीन किया था लेकिन इस बात में भी अनेकों मत दिखाई पड़ते हैं उन्होंने इस पृथ्वी पर राक्षस प्रवृत्ति रखने वाले क्षत्रियों का विनाश किया था यही नहीं इनके क्रोध से भगवान गणेश भी नहीं बच पाए थे। उन्होंने ही भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र उपलब्ध कराया था। पौराणिक कथा में वर्णित है कि महेंद्रगिरि पर्वत भगवान परशुराम की तप की जगह थी और अंतत: वह उसी पर्वत पर कल्पांत तक के लिए तपस्यारत होने के लिए चले गए माना जाता है कि वे कल्प के अंत तक धरती पर ही तपस्यारत रहेंगे।
स्वामी पूर्णानंदपुरी जी ने कहा कि भगवान परशुराम किसी समाज विशेष के आदर्श नहीं है बल्कि संपूर्ण सनातन के पूज्यनीय हैं परन्तु आजकल राजनैतिक कारणों से भगवान भी भिन्न भिन्न दलों में बाँट कर रख दिए हैं जिसके परिणाम स्वरूप आज सनातन धर्म कई खण्डों में बँटता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा अत्यंत विचारणीय है समाज में एकजुटता रखने के लिए आपसी भेदभाव से परे होकर निष्कपट और निश्छल परोपकार की भावना को हृदय में संजोये रखना होगा। अंत में भंडारे प्रसाद का आयोजन किया गया जिसमें रजनीश वार्ष्णेय,तेजवीर सिंह,शिब्बू अग्रवाल,पवन तिवारी,सचिन पाण्डेय,लव उपाध्याय सहित अन्य लोगों का सहयोग रहा।

INPUT – VINAY CHATURVEDI

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