Visitors have accessed this post 19 times.

सिकंद्राराऊ के बगिया बारहसैनी में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास पीठ से भागवताचार्य पंडित शैलेंद्र दीक्षित ने संगीतमय कथा के माध्यम से भगवान के विभिन्न अवतारों और भक्तों के जीवन प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। कार्यक्रम की शुरुआत उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के के. दीक्षित द्वारा व्यास पीठ के पूजन और आचार्य शैलेंद्र दीक्षित के आशीर्वाद ग्रहण करने के साथ हुई। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा समाज में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और श्रेष्ठ संस्कारों का प्रसार करती है। कथा के दौरान आचार्य शैलेंद्र दीक्षित ने सृष्टि उत्पत्ति, भगवान वराह अवतार, माता सती के चरित्र तथा कपिल-देवहूति संवाद का विस्तार से वर्णन किया। भक्त ध्रुव के प्रसंग पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि केवल पाँच वर्ष की आयु में ध्रुव ने दृढ़ संकल्प और अटूट विश्वास के बल पर कठोर तपस्या कर भगवान नारायण के साक्षात दर्शन प्राप्त किए। उन्होंने युवाओं और बच्चों को संदेश दिया कि जीवन में किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ध्रुव जैसी एकाग्रता, धैर्य और आत्मविश्वास आवश्यक है। आचार्य ने माता सती के चरित्र का उल्लेख करते हुए कहा कि अच्छे संस्कार मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं, जबकि कुसंस्कार उसके पतन का कारण बनते हैं। उन्होंने सत्संग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संतों की संगति से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन आता है और उसके जीवन में सद्गुणों का विकास होता है। कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर झूम उठे। कार्यक्रम के समापन पर श्रीमद्भागवत जी की महाआरती संपन्न हुई तथा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर पंडित चेतन शर्मा, संजीव कुमार वार्ष्णेय, राजकुमार वार्ष्णेय, रामकुमार वार्ष्णेय, ममता वार्ष्णेय, केके शर्मा, दाऊ दयाल पुजारी, कुलदीप, राहुल, शिवम दीक्षित, हर्षित चतुर्वेदी सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रीय गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

INPUT – NEERAJ GUPTA