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सिकंद्राराऊ के बगिया बारहसैनी में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास पीठ से सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पंडित शैलेंद्र दीक्षित ने संगीतमय शैली में भगवान के विभिन्न दिव्य अवतारों एवं भक्तों के चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया, जिससे कथा पांडाल भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रीय विप्र एकता मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष मित्रेश चतुर्वेदी द्वारा व्यास पीठ के विधिवत पूजन के साथ हुई। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा समाज में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता और संस्कारों का प्रसार करने का सशक्त माध्यम है। कथा के दौरान आचार्य शैलेंद्र दीक्षित ने सृष्टि उत्पत्ति, भगवान वराह अवतार, माता सती के चरित्र तथा कपिल-देवहूति संवाद का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने भक्त ध्रुव की प्रेरणादायी कथा सुनाते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प, अटूट विश्वास और ईश्वर के प्रति समर्पण से असंभव लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने युवाओं और बच्चों से ध्रुव के जीवन से प्रेरणा लेने तथा कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से विचलित न होने का आह्वान किया। माता सती के प्रसंग की व्याख्या करते हुए आचार्य ने कहा कि अच्छे संस्कार व्यक्ति के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं, जबकि कुसंस्कार विनाश का कारण बनते हैं। संतों का सत्संग मनुष्य के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है और उसे सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। कथा के दौरान प्रस्तुत भजनों पर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर झूम उठे। कथा के समापन पर श्रीमद्भागवत जी की महाआरती की गई तथा सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय विप्र एकता मंच के राष्ट्रीय संयोजक पंडित चेतन शर्मा सहित बीरो वार्ष्णेय, संजीव कुमार वार्ष्णेय, राजकुमार वार्ष्णेय, रामकुमार वार्ष्णेय, ममता वार्ष्णेय, केके शर्मा, दाऊ दयाल पुजारी, कुलदीप, राहुल, शिवम दीक्षित, हर्षित चतुर्वेदी तथा बड़ी संख्या में क्षेत्रीय गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

INPUT – NEERAJ GUPTA











