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हाथरस : संयुक्त उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के संस्थापक राजीव वार्ष्णेय ने आरटीआई कानून की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल को ज्ञापन भेजा है। उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत समय पर सूचना उपलब्ध नहीं कराने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की। राजीव वार्ष्णेय ने कहा कि आरटीआई कानून का उद्देश्य सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, लेकिन कई मामलों में सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया लंबी होने से आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपील की मौजूदा प्रक्रिया के कारण सूचना मिलने में काफी समय लग जाता है। उन्होंने मांग की कि निर्धारित 30 दिन की समय सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराने पर 31वें दिन से संबंधित अधिकारी पर 250 रुपये प्रतिदिन की स्वतः पेनल्टी लागू की जाए और इसके लिए अलग से अपील की आवश्यकता न हो। इसके साथ ही उन्होंने आरटीआई में पहली अपील की प्रक्रिया समाप्त कर सीधे सूचना आयोग में शिकायत दर्ज कराने तथा जानबूझकर सूचना नहीं देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में उन्होंने आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया और कहा कि सूचना के अधिकार का इस्तेमाल करने वाले लोगों को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। राजीव वार्ष्णेय ने कहा कि आरटीआई कानून को प्रभावी बनाने के लिए समयबद्ध सूचना, जवाबदेही और उल्लंघन की स्थिति में तत्काल दंड की व्यवस्था जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी मांगों पर शासन स्तर पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
INPUT – AMIT SHARMA











