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हमें इस बात का यकीन है कि अब भी दुनियाभर में ऐसी कई महिलाएं होंगी जिनके मन में सेक्स से जुड़े कई सवाल होंगे लेकिन संकोच और शर्मिंदगी की वजह से उन्होंने अपने सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश नहीं की होगी। लेकिन आपको यह समझना चाहिए कि सेक्स से जुड़े सवाल पूछने में संकोच करने या शर्म आने जैसी कोई बात नहीं होनी चाहिए क्योंकि दूसरी चीजों की ही तरह सेक्स भी लाइफ का उतना ही अहम हिस्सा है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं सेक्स से जुड़े उन 6 सामान्य सवाल और उनके जवाब जिन्हें पूछने में महिलाओं को आती है शर्म

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जब भी फेक ऑर्गैज्म की बात होती है तो सिर्फ महिलाओं का ही जिक्र होता है। लेकिन इन सबके बीच हम यह भूल जाते हैं कि कई बार पुरुष भी ऐसा करते हैं। 2016 में सेक्शुअल ऐंड रिलेशनशिप थेरपी जर्नल में छपी एक स्टडी के मुताबिक नॉर्थ अमेरिका के 30 प्रतिशत पुरुषों ने इस बात को स्वीकार किया कि वे कई बार नकली ऑर्गैज्म करते हैं। पुरुष फेक ऑर्गैज्म क्यों करते हैं इसकी भी वही वजह है जो महिलाओं की है। ऐल्कॉहॉल का असर, थकान, स्ट्रेस या किसी भी तरह का मेडिकेशन भी इसकी वजह हो सकता है। हालांकि ऑर्गैज्म यानी क्लाइमैक्स तक न पहुंचने का मतलब ये नहीं है कि आपने सेक्स को इंजॉय नहीं किया।

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हां यह पूरी तरह से नॉर्मल है। आपको जानकर हैरानी होगी कि जो महिलाएं ऐनल सेक्स पसंद करती हैं उन्हें ऐनल सेक्स न करने वाली महिलाओं की तुलना में ज्यादा ऑर्गैज्म महसूस होता है। इसकी वजह यह है कि शरीर का यह हिस्सा बेहद संवेदनशील नसों से भरा हुआ है। लिहाजा अगर आपने ऐनल सेक्स को एक्सपीरियंस किया है तो जाहिर सी बात है कि वह आपको वजाइनल सेक्स से ज्यादा पसंद आएगा।

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हालांकि सेक्स के दौरान कॉइल यानी अंतर्गर्भाशयी यंत्र को पार्टनर द्वारा फील करने में कोई खतरा नहीं है लेकिन आप चाहें तो अपने डॉक्टर से कहकर उसे दोबारा से फिट करवा सकती हैं ताकि आपको और आपके पार्टनर को कंफर्टेबल महसूस हो। अगर आपका पार्टनर सेक्स के दौरान इस अंतर्गर्भाशयी यंत्र को महसूस कर पाता है इसका मतलब है कि वह सही तरीके से फिट नहीं किया हुआ है। अगर पार्टनर का पेनिस ज्यादा सेंसेटिव है तो उन्हें यह कॉइल ज्यादा फील होगा।

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सेक्स के दौरान वजाइना से आने वाली आवाजों को वजाइनल फार्ट्स कहते हैं और ऐसा होना बिलकुल सामान्य है। हकीकत तो यही है कि वजाइनल सेक्स के दौरान वजाइना से आने वाली आवाजें अपरिहार्य है और इससे बचा नहीं जा सकता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सेक्स के दौरान हवा वजाइनका के अंदर जाती है जिसे जोर लगाने के दौरान जबरन बाहर निकाला जाता है। ये चीजें बेहद सामान्य हैं और इसे लेकर शर्मिंदगी महसूस करने की जरूरत नहीं।

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हां, ऐसा करना न सिर्फ सामान्य है बल्कि हेल्दी भी। जब भी मास्टरबेशन यानी हस्तमैथुन की बात आती है तो सिर्फ पुरुषों का ही ख्याल आता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि महिलाओं को हस्तमैथुन नहीं करना चाहिए या फिर वे नहीं कर सकती हैं। 2009 में नैशनल सर्वे ऑफ सेक्शुअल हेल्थ ऐंड बिहेवियर (NSSHB)की ओर से एक स्टडी करवायी गई थी जिसमें यह बात सामने आयी थी कि करीब 3 प्रतिशत महिलाएं सप्ताह में 3 बार या इससे ज्यादा हस्तमैथुन करती हैं। पुरुषों की तुलना में बेहद कम महिलाएं हस्तमैथुन करती हैं। इसकी वजह क्या है इस बारे में तो कोई ठोस जानकारी नहीं है लेकिन हस्तमैथुन करने से मूड बेहतर होता है और वजाइना की स्ट्रेंथ बेहतर होती है।

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यूनिवर्सिटी ऑफ टॉरेंटो की ओर से सेंटर फॉर अडिक्शन ऐंड मेंटल हेल्थ में करवायी गई एक स्टडी में यह बात सामने आयी थी कि पुरुष किस चीज को देखकर उत्तेजित होते हैं उससे उनके लैंगिक रूझान का पता चलता है लेकिन यही परिस्थिति महिलाओं के साथ नहीं है। उनके लिंग-भेद के बावजूद महिलाओं को विपरित लिंग वाला पॉर्न देखकर ही उत्तेजना महसूस होती है।

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