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फिल्म दबंग-3 में सलमान खान यानी चुलबुल पाण्डेय इस बार अलीगढ़ के बरला सीओ अनुज चौधरी के किरदार में नजर आएंगे। स्पोर्ट्स कोटे से पुलिस महकमे में आए अनुज चौधरी का जीवन चुनौतीपूर्ण रहा है। उन्होंने अपनी पहचान दबंग और निर्भीक पुलिस कर्मी के रूप में बनाई है। वह पेशेवर खतरनाक व दुर्दान्त अपराधियों को गिरफ्तार कर सजा दिला चुके हैं। गौतमबुद्ध नगर में गुण्डे व माफियाओं पर शिकंजा कस कर जनता के बीच वह चुलबुल पाण्डेय के नाम से प्रसिद्ध हो गए।

फिल्म दबंग 2010 में रिलीज हुई थी, जिसमें सलमान खान ने चुलबुल पाण्डेय के नाम से दबंग पुलिस इंस्पेक्टर का रोल निभाया था। अब दबंग फिल्म की तीसरी सीरीज आने वाली है। बताते हैं कि सलमान खान और अरबाज खान के ्क्रिरप्ट राइटर दिलीप शुक्ला ने दोनों भाइयों को दबंग-3 के लिए गौतमबुद्ध नगर के एसओ रहे अनुज चौधरी असल जिंदगी के बारे में विस्तार से बताया कि वह राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुश्ती में स्वर्ण व रजत पदक ले चुके हैं। उन्होंने दबंग पुलिस वाले के रूप में अपराधियों के बीच पहचान बनाई है और जनता के बीच चुलबुल पाण्डेय के नाम से जाने जाते हैं

इसको लेकर सलमान खान और अरजबाज खान की सहमति पर उन्होंने स्क्रिप्ट भी लिखना शुरू कर दिया। अब जल्द ही फिल्म की शूटिंग शुरू होने वाली है। फिल्म में वेस्ट यूपी के अपराध पर फोकस होगा।

इसमें सलमान खान पुलिस वाले की असल जिंदगी का रोल निभाएंगेये है असल जिंदगीमुजफ्फरनगर के गांव बढ़ेड़ी निवासी अनुज चौधरी 1992 से रेसलिंग कर रहे हैं। 18 साल तक उन्होंनेराष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुश्तियां लड़ी हैं। कुश्ती खिलाड़ी कोटे से वर्ष 2000 में वह एसओ के पद पर तैनात हुए थे। गौतमबुद्ध नगर के फेस-2 थाने में एसओ, उसके बाद दनकौर कोतवाली में कोतवाल तथा दादरी में भी सीओ रहे। उनकी नियुक्ति एसटीएफ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर में रही है। उन्होंने कुख्यात अपराधियों के निर्भीक होकर प्रभावी कार्रवाई की। कई इनामी व दुर्दान्त अपराधियों को भी एनकाउंटर में ढेर कर दिया था। उन्होंने समाज के उन ठेकेदारों पर शिकंजा कसा है जो कुरीतियों को जिंदा रखकर अपराध करते थे। कड़ी मेहनत और लगन से अपनी छवि को जनता में पॉपुलर किया। अनुज चौधरी ने अपनी पहचान वाकई दबंग और निर्भीक पुलिस वाले के रूप में बनाई है। वह रेसलिंग में अर्जुन पुरस्कार, एशिया कॉमनवेल्थ चैम्पियन, लक्ष्मण व यश भारती पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं। गर्दन में चोट लगने के कारण अब उन्होंने रेसलिंग छोड़ दी है।

भट्टा पारसौल प्रकरण में भी निभाई अहम भूमिका

भट्टा पारसौल में भूमि अधिग्रहण को लेकर हुए खूनी संघर्ष में दो किसान व दो पुलिस वालों की मौत हो गई थी। इस प्रकरण में भी अनुज चौधरी ने निर्भीक होकर किसान नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की। किसानों को भड़का कर बवाल करने वालों से सीधा मोर्चा लिया।

पीड़ित को न्याय और अपराधियों में खौफ बनाकर बनाई पहचान

बरला सीओ अनुज चौधरी का कहना है कि उनका मकसद पीड़ित को हरहाल में न्याय दिलाकर अपराधियों में पुलिस का खौफ बनाना है। जब वह गौतमबुद्धनगर में एसओ थे तब अपराधियों से मोर्चा लेने के लिए वह अपने अधीनस्थों के साथ हमेशा खड़े रहे। इससे अधीनस्थों का हौसला बढ़ता है। मुझे भी अपने सीनियर का सपोर्ट मिला है।

अपराधी-अपराधी होता है वह किसी जाति का नहीं

सीओ का कहना है कि अक्सर थानों में जब किसी अपराधी को पकड़कर लाया जाता है तो कुछ पुलिस वाले जाति के नाम पर उसको बचाने का प्रयास करते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। अपराधी अपराधी होता है, कानून की नजर में उसकी कोई जाति नहीं होती। उसके खिलाफ हर हाल में कार्रवाई होनी ही चाहिए।

रील लाइफ से बहुत अलग होती है रीयल लाइफ

सीओ अनुज कुमार का कहना है कि फिल्मों में पुलिस का जो दमदार रोल दिखाया जाता है वह सिर्फ रोल तक सीमित रहता है, लेकिन रीयल लाइफ में पुलिस को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कुछ लोग बेशक पुलिस वाले के कार्यों की सराहना करें, लेकिन तमाम लोग आलोचना कर दिक्कते पैदा करते रहते हैं।

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