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हाथरस। सी0बी0एस0ई0 की परीक्षाएं प्रारम्भ होने में अब कुछ ही महीने शेष हैं अतः विद्यार्थियों को उत्तम अंक पाने के लिए गंभीरता के साथ पढाई प्रारम्भ कर देनी चाहिए।

परीक्षा के कारण तनाव बढता हैं परन्तु यदि कठिन परिश्रम से परीक्षाओं की तैयारी की जाए तो बच्चों को इन समस्याओं का सामना नहीं करना पडता। सर्वप्रथम प्रभावी समय सारिणी का निर्माण करें जिससें समय का प्रबंध्न भली-भाँति हो सके। सटीक योजना से छात्रा अपने दैनिक, साप्ताहिक व दीर्घावधि् (लॉन्ग टर्म) लक्ष्यों को सहजता से प्राप्त कर सकता हैं। इस समय छात्रों को आराम और भरपूर नींद लेनी चाहिए। परीक्षा का पाठ्यक्रम पता होना चाहिए। छात्रों को परीक्षा हेतु सम्पूर्ण पाठ्यक्रम का ज्ञान होना आवश्यक है। प्रत्येक विषय में उत्तम अंक पाने का प्रयास- अधिकतर विद्यार्थी परीक्षा से पूर्व केवल गणित, भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान आदि विषयों पर अपना ध्यान केंद्रित करते है। परन्तु उन्हें लगभग एक घंटा अन्य विषयों को भी देना चाहिए ताकि उनके अंक प्रतिशत में वृद्वि हो सके।

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छात्रों को इस प्रकार योजना बनानी चाहिए ताकि उन्हें किसी भी विषय में कठिनता का सामना ना करना पडे। छात्रों को बीच-बीच में अपनी रूचि के विषयों को भी पढना चाहिए जिससे अन्य विषयों मेंं उनकी रूचि खत्म न हो। पुनरावलोकन के लिए योजना-प्रत्येक विषय के योजनाबद्व पुनरावलोकन पर विशेष जोर देना चाहिए। छात्रों को निरंतर प्रत्येक विषय की पुरावलोकन की प्रक्रिया का अनुसरण करना चहिए। वे अपनी सहायता के लिए महत्तवपूर्ण विषयों, शीर्षको व सूत्रों (पफार्मूला) की मदद से बेहतर ढंग से कर सकें। असमंजस (कन्फ्यूशन) को दूर करने के लिए छात्रा दृष्टि सहायक पाठ्य साम्रगी (वीडियों) की मदद भी ले सकते हैं। वे डायग्राम और फ्लो चार्ट्स की मदद से भी पुनरावलोकन कर सकते हैं। अपनी कमजोरियों को परखना- परीक्षा पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद छात्रा अपनी कमजोरियों को भलीभॉति परखने में सक्षम होता हैं। चाहे वे कमजोरियॉ किसी भी विषय की हों या किसी पाठ की। छात्रा योजना बनाकर तथा पुनरावलोकन द्वारा उन कमजोरियों से बाहर आ सकता हैं और लिखित परीक्षा में उन विषयों का उत्तम प्रदर्शन कर सकता हैं। सैंपल पेपर और पूर्व वर्षों के प्रश्न पत्रों को हल करना-10 सैंपल पेपरर्स के समाधन द्वारा छात्रों को सम्पूर्ण विषयों के कॉन्सेप्टस और परीक्षा के पैटर्नस को समझने में मदद मिलती हैं। मोक टेस्ट द्वारा भी बच्चों के प्रदर्शन का विश्लेषण भी किया जा सकता हैं तथा उनकी कठिनाईयों का आकलन किया जा सकता हैं। इसके अतिरिक्त वे घडी द्वारा स्वयं समय का निर्धरण कर परीक्षा देने के अभ्यास द्वारा परीक्षा कक्ष में समय का प्रबन्धन कर सकते हैं। स्वयं के प्रर्दशन का विश्लेषण-छात्रों के लिए यह भी आवश्यक है कि वे प्रीबोर्ड में अपने प्रर्दशन तथा अंकों का विवरण सुरक्षित रखें कि किस विषय में सर्वोत्तम प्रर्दशन किया जा सकता हैं। इसके अतिरिक्त उन्हें अपनी प्रत्येक परीक्षा में बेहतर प्रर्दशन के लिये अपना विश्लेषण करना चाहिए।

इनपुट : राजदीप तोमर

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