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पुरदिलनगर (हाथरस): सरस्वती विद्या मन्दिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पुरदिलनगर में आयोजित नवचयनित आचार्य एवं प्रधानाचार्य पुनश्चर्या प्रशिक्षण वर्ग के अंतर्गत बुधवार को “शिक्षा की वर्तमान चुनौतियाँ एवं समाधान में हमारी भूमिका” विषय पर एक प्रेरणादायी बौद्धिक सत्र सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में राजकीय महाविद्यालय कासगंज के प्रोफेसर डॉ. सुधीर रावत उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में डॉ. सुधीर रावत ने कहा कि विद्या भारती देशभर में शिक्षा एवं संस्कार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल किताबी शिक्षा देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं राष्ट्रभक्ति से जोड़ना भी विद्यालयों का प्रमुख दायित्व होना चाहिए।
उन्होंने वर्तमान समय में मोबाइल की बढ़ती लत, अनुशासनहीनता, संस्कारों में कमी तथा शिक्षा के व्यावसायीकरण जैसी चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की। डॉ. रावत ने कहा कि शिक्षक केवल अध्यापक नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के मार्गदर्शक एवं मेंटोर की भूमिका निभाएँ। उन्होंने विद्यालयों को ज्ञान का पवित्र मंदिर बताते हुए प्रधानाचार्य, आचार्य एवं प्रबंध समिति के बीच बेहतर समन्वय को आवश्यक बताया।
कार्यक्रम में उपस्थित आचार्यों एवं प्रधानाचार्यों ने विषय को गंभीरता से सुना और शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प लिया। प्रधानाचार्य हरीशंकर शर्मा ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर सतीश समर्थ (निवर्तमान अध्यक्ष, जन शिक्षा समिति ब्रज प्रदेश), अरविन्द चौधरी (सदस्य, जन शिक्षा समिति ब्रज प्रदेश), देवेंद्र यादव (प्रदेश निरीक्षक), संदीप मिश्रा, यशपाल सिंह, कमलप्रकाश द्विवेदी, विचित्रपाल, महेन्द्र पाल, पुष्पकांत शर्मा (पत्रकार, प्रावदा दैनिक), प्रधानाचार्य राजेश कुमार, श्रीनिवास सिंह, योगेंद्र सिंह, कृष्णकांत, आचार्य राकेश कुमार, शिशुपाल सिंह, हरपाल सिंह, विक्रम सिंह, राजन सिंह, अनिल कुमार एवं प्रवीन कुमार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। बौद्धिक सत्र का संचालन श्री कृष्णकांत जी, प्रधानाचार्य पुरा कला हाथरस ने किया।
इनपुट : पुष्पकांत शर्मा









