Visitors have accessed this post 33 times.

मलेरिया के इलाज के लिए एक नया टीका विकसित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए वैज्ञानिक पहली बार यह पता लगाने में सफल हुए हैं कि मलेरिया परजीवी हमारी कोशिकाओं पर किस तरह हमला करते हैं।

नोबल पुरस्कृत तकनीक क्रायो-ईएम (क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी) का इस्तेमाल करते हुए अनुसंधानकर्ताओं ने प्लाजमोडियम विवेक्स मलेरिया परजीवियों और लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) के बीच पहली बार संपर्क होने की प्रक्रिया का खाका खींचा है। इसी प्रक्रिया के जरिए यह परजीवी पूरे शरीर में फैलना शुरू करता है।

तकनीक का इस्तेमाल कर वैज्ञानिक इस संपर्क को सूक्ष्मतम स्तर पर देख पाने में सक्षम हुए जो अभी तक संभव नहीं हो सका था। इस नए अध्ययन में ऑस्ट्रेलिया के वाल्टर एंड एलिजा हॉल इंस्टीट्यूट के अनुसंधानकर्ताओं ने मलेरिया परीजीवी द्वारा लाल रक्त कोशिकाओं को निशाना बनाने के लिए अपनाए जाने वाले बेहद सूक्ष्म तरीके का रहस्य सुलझा लिया है।

मलेरिया के जीवनचक्र का यह बेहद आवश्यक हिस्सा है जिसके कारण मलेरिया संबंधी विशेष लक्षण- बुखार, ठंड लगना, बेचैनी, दस्त और उल्टी नजर आने शुरू होते हैं। ये बीमारी एक हफ्ते या उससे ज्यादा वक्त तक एक व्यक्ति को परेशान कर सकती है। यह अध्ययन नेचर पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।

पी विवाक्स दुनियाभर में सबसे ज्यादा फैलने वाला मलेरिया परजीवी है और अफ्रीका से बाहर के देशों में मलेरिया होने का मुख्य कारण है। यह किसी व्यक्ति के पेट में इस परजीवी का असर अधिक रहता है जिसे शरीर का इम्यून सिस्टम यानी रोग से लड़ने की क्षमता का भी इसपर असर नहीं होता है।

वैज्ञानिक कहते हैं कि इसका आकार एक चुनौती है। पी विवाक्स परजीवी काफी अलग होते हैं जो टीका के विकास के लिए चुनौतीपूर्ण हैं। हमने एक ऐसा आण्विक प्रणाली तैयार किया है जो इस परजीवी की चुनौती को खत्म करने में मददगार होगी।

Input soniya

यह भी पढ़े:

बरसात के मौसम में इन बातों का रखें ख्याल फलों का सेवन करने से पहले

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here